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दिल्ली में शशि थरूर का बड़ा बयान: संवैधानिक संशोधन पर बीजेपी को झटका, लोकतंत्र बचाने का दावा

Published: 18/4/2026, 10:14:20 am11 viewsSeemanchal Live

दिल्ली में शशि थरूर का बयान: संवैधानिक संशोधन पर राजनीति गरम दिल्ली से सामने आई बड़ी राजनीतिक खबर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संवैधानिक संशोधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ( भारतीय जनता पार्टी ) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत है और बीजेपी आवश्यक दो-तिहाई बह

दिल्ली में शशि थरूर का बड़ा बयान: संवैधानिक संशोधन पर बीजेपी को झटका, लोकतंत्र बचाने का दावा
दिल्ली में शशि थरूर का बयान: संवैधानिक संशोधन पर राजनीति गरम दिल्ली से सामने आई बड़ी राजनीतिक खबर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संवैधानिक संशोधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ( भारतीय जनता पार्टी ) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत है और बीजेपी आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से 52 वोट पीछे रह गई। शशि थरूर के अनुसार, यह वोट महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं था, बल्कि परिसीमन (delimitation) और संसद के विस्तार से जुड़ी चिंताओं के खिलाफ था। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। संवैधानिक संशोधन पर बीजेपी को झटका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि बीजेपी जिस संवैधानिक संशोधन को पास करना चाहती थी, उसमें उसे जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा: "यह एक बहुत ही ठोस जीत है। बीजेपी दो-तिहाई बहुमत से 52 वोट कम रह गई।" यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि विपक्ष इस परिणाम को अपनी रणनीतिक जीत के रूप में देख रहा है। लोकतंत्र बचाने का दावा शशि थरूर ने इस नतीजे को लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि उनका वोट देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने के लिए था। उनके अनुसार: "हमने लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट किया है। परिसीमन और संसद के विस्तार से जो प्रभाव पड़ता, वह हमारे लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक होता।" यह बयान राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मुद्दे को केवल कानून तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे लोकतंत्र की बुनियाद से जोड़ता है। महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी शशि थरूर ने कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा: "हमने अपने भाषणों में भी कहा कि अगर महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर दिया जाए, तो हम उसका समर्थन करेंगे।" इससे यह साफ होता है कि कांग्रेस इस बिल के कुछ हिस्सों का समर्थन करती है, लेकिन उसमें जुड़े अन्य प्रावधानों से असहमत है। परिसीमन को लेकर चिंता परिसीमन (delimitation) को लेकर कांग्रेस की मुख्य आपत्ति सामने आई है। शशि थरूर ने कहा कि परिसीमन और संसद के आकार में संभावित बढ़ोतरी लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। यह मुद्दा भारत की राजनीति में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, क्योंकि इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। बीजेपी की रणनीति पर सवाल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता के रूप में शशि थरूर ने बीजेपी की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर एक जटिल स्थिति पैदा की। यह बयान यह संकेत देता है कि विपक्ष सरकार के कदम को राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहा है। राजनीतिक माहौल में बढ़ती गर्मी इस बयान के बाद दिल्ली की राजनीति और भी गर्म हो गई है। एक तरफ जहां बीजेपी अपने बिल को सही ठहरा रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र के खिलाफ कदम बता रहा है। संभावित राजनीतिक प्रभाव इस पूरे घटनाक्रम के कई बड़े राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं: संसद में विपक्ष की एकजुटता मजबूत होना महिला आरक्षण पर नई बहस परिसीमन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा आगामी चुनावों में मुद्दों का बदलाव निष्कर्ष दिल्ली में शशि थरूर का यह बयान केवल एक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में चल रही गहरी वैचारिक लड़ाई को दर्शाता है। महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर यह बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है। FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) 1. शशि थरूर ने क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि बीजेपी संवैधानिक संशोधन में दो-तिहाई बहुमत से 52 वोट कम रह गई और यह लोकतंत्र की जीत है। 2. क्या कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ है? नहीं, कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन उसे परिसीमन से अलग करने की मांग करती है। 3. परिसीमन क्या है? परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होता है। 4. बीजेपी को कितना नुकसान हुआ? बीजेपी 52 वोट से दो-तिहाई बहुमत हासिल करने से चूक गई। 5. इस मुद्दे का लोकतंत्र से क्या संबंध है? विपक्ष का मानना है कि परिसीमन और संसद विस्तार लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। 6. आगे क्या हो सकता है? इस मुद्दे पर संसद और देशभर में राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

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